अगर ज़िदंगी ठहर जाए दो पल
मैं अपने लिए निकालूं दो पल
तेरी मौजूदगी खो जाए अगर दो पल
मैं अपने लिए निकालूं दो पल
अगर ये शोर थम जाए दो पल
मैं अपने लिए निकालूं दो पल
जो बीता, वो था कल
जो आएगा, कैसा होगा कल
इस कल की फिकर भूल पाऊं अगर दो पल
मैं अपने लिए निकालूं दो पल
हार जाने के डर को भूल पाऊं अगर दो पल
मैं अपने लिए निकालूं दो पल
दिल को दिमाग की कैद से आजाद कर पाऊं अगर दो पल
मैं अपने लिए निकालूं दो पल
बंद आंखों को जब ना हो फिकर, क्या होगा कल
उस पल मैं अपने लिए निकालूं दो पल
शांत कहीं बैठूं और देख पाऊं इस बहते पानी की हलचल
जिस पल, मैं अपने लिए निकालूं दो पल
आंखों मैं अपनी कैद कर लूं आते जाते सूरज के कलरव
जिस पल, मैं अपने लिए निकालूं दो पल
कांटों को भूल, फूल की महक को छू पाऊं अगर दो पल
उन पलों को करार दे दूं, मेरे दो पल
हर पल का रखना हिसाब अगर मैं छोड़ दूं दो पल
उस कल, मैं अपने लिए निकालूं दो पल!!
"Tiara"