कुछ रोज़ से लगने लगा है,
दिल मेरा थम सा गया है...
हो गया मुझको यकीन, जिस दिन से मैंने ये सुना है
इस बार जो हुआ, वो गलती नहीं एक गुनाह है!
कोई मिलकर आया था तो किसी को जाना था
दिन वेलेंटाइन का प्यार से सबको मनाना था...
गाने के उन बोलों को चीख में जिसने बदला था
नापाक इरादों से सराबोर वो पाक का हमला था!
कहते हैं दिन वो लाल का था
जिस मां ने खोया पूछो उसका हाल क्या था!
ज़िंदा या मुर्दा ये सवाल ना था,
जिस मां ने खोया पूछो उसका हाल क्या था!
हर दिल में उठा एक सवाल सा था,
क्या मारने वाले हाथों को अपना ख्याल ना था!
जैश ने एक को भेजा सबको लाने था
पर 40 को खोकर भी सुरक्षा बल बंदूक ताने था!
कायर पाक ने अपनी कायरता का भेजा पैमान सा था
हर देश से सुनकर भी अपनी निंदा उसे एहसास-ए-अपमान ना था!
अंत नहीं, यह एक नवल जंग का सा आगाज़ था
और मैदान में लाचार सा अपनी झूठी मासूमियत की गवाही दे रहा वो, जो खुद को समझता सरताज था!
देश का हर एक नागरिक युद्ध चाहता था
लगता है 40 को करने 400, उसने ठाना था!
काम जो जिसका, उसको करने देना चाहिए
पर पहले जाकर कोई मीडिया को चुप रहना सिखाइए...
1971 में सोए मिराज को फिर जगाना था,
13 दिन पहले खोए उन जवानों का बदला जो चुकाना था!
धरा पर गिरे उस लहू का हिसाब आसमां को उठाना था
सीमा के उस पार जाकर अब आतंक को हराना था!
अब ना देश के बेटे बेटियों को भेजेंगे युद्ध में, 1962 कारगिल का प्रण था ये
पर भेजकर F-16, भारतीय MiG-21 से फ़िर मुंह की खाना, घायल पाक का दृढ़ था ये!
ना चाहते हुए भी हम युद्ध का वंदन कर बैठे,
और दुश्मन को मार गिराने, हम दुश्मन को ही न्योछावर अपना अभिनंदन कर बैठे!!
इस बार जो गया था, वो एक सिपाही था
दुश्मन को उसका पथ दिखलाने, अपने पथ से भटका एक राही था!
लाख साजिशें कर ली, पर उसने कुछ ना बतलाया
पर हमारी मीडिया को किसी ने, उसका फ़र्ज़ क्यों ना सिखलाया!
आज दुआ मांगने ना उठा हो, वो भारतीय कौन था
और अपना फ़र्ज़ निभाता, वो वहां मौन था!
भारत के संसाधन से फलता, पाक मुरझा सा गया है
जेनेवा एक्ट का सुनकर तो, बेचारा झुंझला सा रहा है!
60 घंटों की उस चुप्पी को मेरा सलाम है
अभिनंदन का वापस आ जाना ही, पाक का सबसे बड़ा अपमान है!!
"TIARA"