Launchorasince 2014
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"यकीन क्या है"

यकीन क्या है, यकीन कैसा है
इससे पूछा तो ऐसा है उससे पूछा तो वैसा है
शायद यकीन कुछ सुकून के जैसा है...
फिर सुकून क्या है!
क्या गर्मी में सर्द हवा का झोंका है,
या बस कुछ पल थमने वाला एक धोका है
आओ कुछ सोचे फिर बोले, किसने रोका है!!

शायद यकीन कुछ गहरा सा है
सोचो और बतलाओ, क्यों शब्दों पे पहरा सा है!
लेकिन गहरा है तो कितना गहरा है
और हर जवाब पर क्यू एक सवाल ठहरा है!
यकीन की गहराई कैसे जानोगे
क्या इसे रिश्ते की डोर से जांचोगे
डोर नाज़ुक है, प्यार से थामोगे तो जानोगे...

शायद यकीन कुछ मुश्किल सा है
चलो मुश्किल है, नामुमकिन तो नहीं
पर मुश्किल भी कुछ नामुमकिन से कम तो नहीं!
पर यकीन में कम, ज़्यादा का क्या फर्क है
जैसे दिन रात, प्रथ्वी आकाश, वैसे या तो है, या नहीं है
यकीन का इतना मुश्किल होना, क्या सही है?
चलो थोड़ा और टटोलते हैं, अभी तो शुरुआत हुई है!!

सुना है यकीन कुछ डरावना सा है
पर डर में कितनी सच्चाई है!
डर तो खुद सच और झूठ की परछाई है
फिर यकीन का डर से क्या नाता है
और दोनों में इंसान क्यूं घबराता है
एक कदम उठाना, क्या ये दोनों में जरूरी है
चलो आजमाकर देखते हैं, आखिर मजबूरी है...

यकीन कुछ बहुत हिम्मत का काम है
पर जिसने जो बोला वो मान लो, क्या यही इस हिम्मत का अंजाम है!
फिर सच और झूठ में क्या अंतर है
क्या यकीन, जादू टोना या कुछ मंतर है
फिर यकीन करें या न करें, अब सवाल ये है
पर अब कहां, सवाल तो शुरू से यही है
की यकीन क्या है और यकीन करना कितना सही है!!

यकीन ज़रूर कुछ असमंजस में फसने जैसा है
पर यकीन लोगों पर हो, बातों पर हो या रिश्तों पर, ये कैसे समझें
बातें तो रोज़ बदलेंगी, लोग भी बदलेंगे, फिर रिश्तों में कब तक उलझें
पर उलझे तो ज़िन्दगी में भी हैं!
और क्या हमे और ज़िन्दगी को, एक दूसरे पर यकीन है?
अगर यकीन है, तो मसला क्या है
और अगर यकीन नहीं है, तो अब फैसला क्या है...

शायद यकीन माज़ी के अनुभव से बनता है
कभी सब पर होता है, कभी सबसे बचता है!
पर माज़ी तो कुछ सिखाता है,
अब सिखाता है तो सही होगा
पर सही है, तो माज़ी में इतना गलत कैसे था
या माज़ी तो माज़ी था, हम ही गलत से जुड़े रह गए!
लो..यकीन क्या है, हम फिर इसमें उलझे रह गए!!

यकीन अंधेरे में उजाले सा है,
यकीन रात के बाद सुबह सा है
कभी यकीन मुश्किल है, फिर भी है!
और कभी आसान है, फिर भी नहीं है
क्या यकीन पानी सा है, चंचल सा, कभी थमने ना वाला
या बस एक एहसास है, जिसे जानने की प्यास है!
कभी यकीन सपने सा है, और कभी सपने को यकीन की दरकार है!!

यकीन बनता है, यकीन टूटता है
यकीन हंसता है, यकीन रूठता है!
यकीन नींव है, यकीन बुनियाद है
कभी यकीन मजबूत है, कभी यकीन फरियाद है...
यकीन इसका उससे नाता है, यकीन उसका इससे धोका है
कहीं यकीन है, पर रिश्ता नहीं और कहीं रिश्ता है, पर यकीन नहीं!
यकीन बस यकीन है, जो उन्हें मुझ पर है, पर मुझे उन पर नहीं!!

                                                            "Tiara"

"यकीन क्या है" by Shivangi Singh Kushwah | Launchora