Launchorasince 2014
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झूले

खाली पड़े वो झूले, बुलाते हैं फिर
आओ बैठो झूलो, चाहें जाओ गिर

सूनी सी वो दोपहर और मुरझा गई
बच्चों की वो हंसी जब से धुंधला गई

गिरते बच्चे, हस्ते पंछी सब अब यादें हैं
हर शाम झूला झुलाने वाले भूले बिसरे वादे हैं

अब भी खोई, उन यादों को जीती रहती हूं
आएंगे दिन वो वापस, उन खाली झूलों से कहती रहती हूं...

            -"Tiara"