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"ज़िन्दगी का सफर"

ज़िन्दगी के सफ़र में कितने साए मिलते हैं
अपने पलभर तो कुछ अजनबी ताउम्र साथ चलते हैं!


ज़िन्दगी के सफ़र में कितने रिश्ते बनते हैं
कुछ बेनाम ही जग में मशहूर तो कुछ देने अंजाम एक नाम को तरसते हैं!


ज़िन्दगी के सफ़र में कितने मौसम बदलते हैं
कभी कुछ संग हवा के नया सा आता है, कभी कीमती कुछ मोती खुद से बिछड़ते हैं!


ज़िन्दगी के सफ़र में कितने रंग खिलते हैं
कुछ उजली सुबह के बाशिंदे, कुछ डूबते सूरज से मचलते हैं!


ज़िन्दगी के सफ़र में कितनी रोशनियां टिमटिमाती हैं
कुछ दूर अंधेरे को करती, कुछ गुमनाम अंधेरों में ले जाती हैं!


ज़िन्दगी के सफ़र में कितनी आवाज़ें सुनने मिलती हैं
कुछ मन शांत करतीं, कुछ शांत मन को विचलित कर जाती हैं!


ज़िन्दगी के सफ़र में क्या कुछ देखने मिलता है
कुछ सवालों के कटघरे में खड़ा करता तो कुछ अविश्वसनीय अनुभव सा लगता है!


ज़िन्दगी के सफ़र में कितनी यादें बनती हैं
कुछ मिटती ना कभी लकीर सी तो कुछ समंदर की रेत सी फिसलती हैं!


ये सफ़र है, यूं ही चलता रहेगा
कुछ तेरी सुनेगा, कुछ तुझसे कहेगा!


इसकी कही पर मत जाना, ये झूठ भी बोलता है
बीते समय के कुछ अनसुलझे रहस्यों को भविष्य में खोलता है!


ये सफ़र सिखाने में बड़ा माहिर है
पर सबक में छुपी सीख को समझना, ये काम है हमारा, ज़ाहिर है!


रास्तों में मंजिलें ढूंढ़ो, मंज़िल के रास्ते का इंतजार तो बढ़ता रहेगा
मंज़िल मिल भी गई तो क्या, ये सफ़र है यूं ही चलता रहेगा!!


-“Tiara”