Launchorasince 2014
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"नाराज़गी"

नाराज़ मेरे अपने, नाराज़ मेरे सपने
कि मुझे वक़्त कहां है!

नाराज़ मेरी रूह, नाराज़ वो यूं
कि मुझे वक़्त कहां है!

नाराज़ मेरी ख्वाहिशें, नाराज़ मेरी हसरतें
कि मुझे वक़्त कहां है!

नाराज़ मेरे दिन, नाराज़ मेरी रातें
कि मुझे वक़्त कहां है!

नाराज़ वो दुख, नाराज़ वो खुशियां
कि मुझे वक़्त कहां है!

नाराज़ वो शांति, छाई हुई भ्रांति
कि मुझे वक़्त कहां है!

नाराज़ वो चंदा, नाराज़ वो सूरज
कि मुझे वक़्त कहां है!

नाराज़ बहता पानी, यही तारों की भी कहानी
कि मुझे वक़्त कहां है!

नाराज़ उड़ते पंछी, नाराज़ लगते बच्चे
कि मुझे वक़्त कहां है!

नाराज़ खिलते फूल, नाराज़ से वो भंवरे
कि मुझे वक़्त कहां है!

नाराज़ मेरे कदम, नाराज़ मेरी सांसें
कि मुझे वक़्त कहां है!

नाराज़ मुझसे दूर, नाराज़ मेरा नूर
कि मुझे वक़्त कहां है!

नाराज़ मेरी धड़कन, नाराज़ वो अड़चन
कि मुझे वक़्त कहां है!

नाराज़ उनकी चाहतें, नाराज़ सा मेरा वक़्त
कि मुझे वक़्त कहां है!

नाराज़ ज़रा सी लगती ये नाराजगी भी
कि मुझे वक़्त कहां है!!

-“Tiara”