पानी हो या दर्पण, जो जैसा है वैसा दिखलाते हैं
परत चढ़ी हो जितनी, खूबसूरती उतनी लाते हैं!!
पर एक आईना वो भी है जिसमें कोई दीवार नहीं
ये वो रोशनी है, बिना अंधेरे जिसका दीदार नहीं!!
बाहर जितना शोर मचा है, अंदर उतना ही शोर थमा है
थके थके से दिखते हैं सब, पर अंदर का कुछ और समां है!!
आंख खुली हो जब तक, टिमटिमायेंगे भ्रम के तारे
बंद करोगे नैनों को जब, राज़ खुलेंगे अंदर के सारे!!
-"Tiara"