Launchorasince 2014
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"इंडिया गेट"

प्रथम विश्वयुद्ध में जो हुए शहीद, मुझमें अब तक जिंदा हैं
ना उनकी, ना मेरी जिसको फिक्र लगी, वो क्यों ना शर्मिंदा हैं!
मेरी लॉ तो मुझमें जल रही, तू अपनी बता कहानी
भारत का वो द्वार हूं मैं, जो याद दिलाता तुझे तेरी जवानी!!

प्रदूषण के कफन से बेहतर, ओस और कोहरे का चोला है
सीमाओं को लांघ चले जो तुम, तब जाकर ये द्वार बोला है!
दर्पण में जो देखूं खुद को, अंधकार सा दिखता है
और ये वो समाज है, जहां सच से ज़्यादा झूठ बिकता है!!

उठो, लड़ो, मारो, पर कारण से वाकिफ रहना
बंद आंखों से जो बढ़ोगे आगे, तो याद रखो, पड़ेगा सहना!
हुकूमत-ए-हिंदुस्तान का रक्षक हूं मैं, तुमको मेरा बनना है
खड़ा रहूं मैं इसी तरह तना, तुमको प्रण ये लेना है!!

दिल्ली की आवाम मुझे पूरा भारत दिखलाती है
पर कोहरे सी लगती ये काली धुंध, मुझे झकझोर जाती है!
मेरी हर एक ईंट पर, उभरी एक कहानी है
जब रखोगे खुद को ज़िंदा तब बतला पाओगे ये द्वार नहीं, एक निशानी है!!

भारत को रखने ज़िंदा, जाने कितने कदम उठाए गए
और भारत को करने ज़िंदा, जाने कितने सैनिक गवाए गए!
अमर जवान ज्योति की ज्वाला धधक रही है जाने कब से,
प्रण लो, धरती मां को बचाना तुम्हारा कर्तव्य है अब से!!

-“Tiara”