हां काफी मिन्नतें की हैं लोगों ने..
हां काफी मिन्नतें की हैं लोगों ने..
आज वक़्त आया है अपनी कहानी मुकर्रर करने का..
आज बयां करनी है वो दास्तान..
जो शायाद हर तीसरे दिल की कहानी है..
कुछ अनजानी तो कुछ जनी पहचानी है..
प्यार था वो हसीन..
एक सालों पुराना किस्सा है..
मुझमें आज भी कहीं बाकी..
तेरा कोई हिस्सा है..
चार साल पहले की वो मुलाक़ात
आज भी याद है मुझे..
तेरी कही वो हर एक बात..
क्या खुशनुमा ज़माना था वो..
बहारों से सजा वो नज़ारा था..
वो वक़्त सिर्फ हमारा और तुम्हरा था
वो वक़्त जब प्यार हमारा..
दुनिया के लिए मिसाल था..
हमें जुदा कर पाना..
एक बेहद मुश्किल सवाल था..
भरोसा इतना था कि..
शक की कोई गुंजाइश ना थी..
हमारे उस रिश्ते में..
गैरों की आज़माईश ना थी..
हां रंजिशें थी..
कुछ कम ही..
लेकिन मुहब्बत बेहद अबीब थी..
वो ज़माना भी क्या ज़माना था..
जब मै..
तुम्हारे सबसे ज़्यादा करीब थी..
नज़र लगी हाय..! किसी की ये कैसी..
हुई वो मुहब्बत तबाह..
सोचा नहीं था..
तवीफ - ए - इन्कार उनका..
इस कदर तोड़ देगा..
मौत के छोर पर लाकर हमें..
यूं गुमराह तन्हा राहों में छोड़ देगा..
हमें ज़िंदा लाश बनाकर छोड़ देगा..
संभलना खुद ही सीख लिया..
किसी की आरज़ू अब करते नहीं हम..
याद आने पर अब तुम्हारी..
आहें भरते नहीं हम..
बेफिक्र होकर जीते हैं..
सच बोलने से अब..
डरते नहीं हम..
अब ज़्यादा मतलब रखते नहीं किसी से..
हां अब सबसे गुफ्त - गू करते हैं कम..
इस तरह अपनी ज़िन्दगी की हर चाल अब..
अपने ही उसूलों पे चलते हैं हम..//
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