कई राज़ दफन हैं हर एक के अंदर,
सब कुछ चाहे हो साफ यहां, धुंधला फिर भी कुछ रह जाता है,
चुप रहने का सोचे हर राही, कुछ ना कुछ कह जाता है!
कहते-कहते फिर संभलता बात अधूरी कर जाता है,
कुछ पलों में खुलने वाला राज़, फिर राज़ ही रह जाता है!!
गिरता-उठता पर्दा उत्सुक सबको कर जाता है,
शब्दों के इस खेल में, हाव-भाव भी खूब साथ निभाता है!
मेरा राज़, उसने जाना; इसने पूछा, क्यूं भला तुझे बताना!
झूठा ही सही, पर जानने को उत्सुक है सारा ज़माना!!
फिर आज चलो पर्दा गिरा ही देते हैं,
धुंधली सी इस दुनिया को, उजला सा राज़ बता ही देते हैं!
मेरा राज़ जान कर, पर मिलेगा तुम्हे क्या!
पहले खोलो तुम राज़ ये, फिर सोचते हैं पर्दा गिराना सही है क्या...
-"Tiara"