Lord Hanuman is said to be trouble shooter & the gateway to pray Lord Rama.It's said and well tried that Whenever you are in crisis/fear chant Hanuman Chalisa, which would help out in easing out yourself.
A statuette of Lord Hanuman is among few items that ex US President Barack Obama always carries in his pocket and seeks inspiration from whenever he feels tired or discouraged. Recently he disclosed this in a recent interview with YouTube creator Nilsen at White House.
Obama, whose father was a Kenyan and mother a white woman from Kansas, spent initial days of his life in Indonesia where Hinduism is a popular religion.
संकट मोचन हनुमान जी के ब्रह्मचारी रूप से तो सब परिचित हैं..
उन्हें बाल ब्रम्हचारी भी कहा जाता है…
लेकिन क्या अपने कभी सुना है की हनुमान जी का विवाह भी हुआ था ??
और उनका उनकी पत्नी के साथ एक मंदिर भी है ??
जिसके दर्शन के लिए दूर दूर से लोग आते हैं..
कहा जाता है कि हनुमान जी के उनकी पत्नी के साथ दर्शन करने के
बाद घर मे चल रहे पति पत्नी के बीच के सारे तनाव खत्म हो जाते हैं.
हनुमानजी और उनकी पत्नी सुवर्चला का मंदिर तेलंगाना(पहले आन्ध्र प्रदेश) के खम्मम जिले में है यह एक प्राचीन मंदिर है। हनुमान जी का यह मंदिर काफी मायनों में ख़ास है..
ख़ास इसलिए की यहाँ हनुमान जी अपने ब्रम्हचारी रूप में नहीं बल्कि गृहस्थ रूप में अपनी पत्नी सुवर्चला के साथ विराजमान है.
यहां हनुमानजी और उनकी पत्नी सुवर्चला की प्रतिमा विराजमान है। यहां की मान्यता है कि जो भी हनुमानजी और उनकी पत्नी के दर्शन करता है, उन भक्तों के वैवाहिक जीवन की सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं और पति-पत्नी के बीच प्रेम बना रहता है।
खम्मम जिला हैदराबाद से करीब 220 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। अत: यहां पहुंचने के लिए हैदराबाद से आवागमन के उचित साधन मिल सकते हैं। हैदराबाद पहुंचने के लिए देश के सभी बड़े शहरों से बस, ट्रेन और हवाई जहाज की सुविधा आसानी से मिल जाती है।
हनुमान जी के सभी भक्त यही मानते आये हैं की वे बाल ब्रह्मचारी थे.
और बाल्मीकि, कम्भ, सहित किसी भी रामायण और रामचरित मानस में
बालाजी के इसी रूप का वर्णन मिलता है..
लेकिन पराशर संहिता में हनुमान जी के विवाह का उल्लेख है.
इसका सबूत है तेलंगाना(पहले आन्ध्र प्रदेश) के खम्मम ज़िले में बना खास मंदिर जो प्रमाण है हनुमान जी की शादी का।
ये मंदिर याद दिलाता है रामदूत के उस चरित्र का जब उन्हें विवाह के बंधन में बंधना पड़ा था।
लेकिन इसका ये अर्थ नहीं कि भगवान हनुमान जी बाल ब्रह्मचारी नहीं थे।
पवनपुत्र का विवाह भी हुआ था और वो बाल ब्रह्मचारी भी थे।
कुछ विशेष परिस्थियों के कारण ही बजरंगबली को सुवर्चला के साथ विवाह बंधन मे बंधना पड़ा।
हनुमान जी ने भगवान सूर्य को अपना गुरु बनाया था। हनुमान, सूर्य से अपनी शिक्षा ग्रहण कर रहे थे…
सूर्य कहीं रुक नहीं सकते थे इसलिए हनुमान जी को सारा दिन भगवान
सूर्य के रथ के साथ साथ उड़ना पड़ता और भगवान सूर्य उन्हें तरह- तरह की विद्याओं का ज्ञान देते।
लेकिन हनुमान जी को ज्ञान देते समय सूर्य के सामने एक दिन धर्मसंकट खड़ा हो गया।
कुल ९ तरह की विद्या में से हनुमान जी को उनके गुरु ने पांच तरह
की विद्या तो सिखा दी लेकिन बची चार तरह की विद्या और ज्ञान ऐसे थे जो केवल किसी विवाहित को ही सिखाए जा सकते थे.
हनुमान जी पूरी शिक्षा लेने का प्रण कर चुके थे और इससे कम पर वो मानने को राजी नहीं थे।
इधर भगवान सूर्य के सामने संकट था कि वो धर्म के अनुशासन के कारण किसी अविवाहित को कुछ विशेष विद्याएं नहीं सिखला सकते थे।
ऐसी स्थिति में सूर्य देव ने हनुमान जी को विवाह की सलाह दी..
और अपने प्रण को पूरा करने के लिए हनुमान जी भी विवाह सूत्र में बंधकर शिक्षा ग्रहण करने को तैयार हो गए।
लेकिन हनुमान जी के लिए दुल्हन कौन हो और कहा से वह मिलेगी इसे लेकर सभी चिंतित थे.. ऐसे में सूर्यदेव ने अपने शिष्य हनुमान जी को राह दिखलाई।
सूर्य देव ने अपनी परम तपस्वी और तेजस्वी पुत्री सुवर्चला को हनुमान जी के साथ शादी के लिए तैयार कर लिया।
जब हनुमानजी विवाह के लिए मान गए , सूर्य देव ने हनुमानजी से कहा कि सुवर्चला परम तपस्वी और तेजस्वी है और इसका तेज तुम ही सहन कर सकते हो। सुवर्चला से विवाह के बाद तुम इस योग्य हो जाओगे कि शेष 4 दिव्य विद्याओं का ज्ञान प्राप्त कर सको। सूर्य देव ने यह भी बताया कि सुवर्चला से विवाह के बाद भी तुम सदैव बाल ब्रह्मचारी ही रहोगे, क्योंकि विवाह के बाद सुवर्चला पुन: तपस्या में लीन हो जाएगी।
इसके बाद हनुमान जी ने अपनी शिक्षा पूर्ण की और सुवर्चला सदा के लिए अपनी तपस्या में रत हो गई।
इस तरह हनुमान जी भले ही शादी के बंधन में बांध गए हो लेकिन शाररिक रूप से वे आज भी एक ब्रह्मचारी ही हैं.
पराशर संहिता में तो लिखा गया है की खुद सूर्यदेव ने इस शादी पर यह कहा की – यह शादी ब्रह्मांड के कल्याण के लिए ही हुई है और इससे हनुमान जी का ब्रह्मचर्य भी प्रभावित नहीं हुआ …
© Pavan Datta
Disclaimer:
This is work of respect to Lord Hanuman. Information posted in the story are collected from various sources and are for the purpose of writing post only and no actual attitude toward or connection with such is to be inferred.
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