ख्वाबीदा नजरें हैं..
और मलाल दिल को ख्वाब देखने का है....
उनका अक्स दिखता है उन ख्वाबों में..
पूरे हो ना सके जो....
वाबस्तगी में मौज़ू-ए-गुफ़्तुगू का..
होना भी उस क़दर ज़रूरी सा है..
इलतिफ़ात जैसे इश्क़ में..
उंस है उनके लफ़्ज़ों से भी..
इस बात का उन्हें एहसास भी..
करवाना कुछ ज़रूरी सा है..
उन्हें हमसे मुहब्बत है या नहीं..
इस बात का इल्म हमें फिलहाल तो नहीं..
लेकिन जिस हाल उनका इज़हार आता है..
ज़ाहिर तरानेइश्क़ ही बताता है..।।
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