ज़िन्दगी और पेड़
दोनों है एक समान
कठिनाईयों का सामना करके
दोनों में भर जाती है एक नयी जान|
आदमी है उस पेड़ की शाखाओं जैसा
हरियाली है खुशियाँ
और सूखा है उदासी
पर एक समानता है दोनों में भाई
अंधियारे के बाद सुहावनी सुबह है दोनों ने पाई|
जिस तरह पेड़ को
जल और प्रेम से सींचा जाए
उसी तरह यह जीवन भी
सूझ, बूझ, और संयम से संवर जाए|
फूलों जैसी खुश्बू
और फलों की मिठास
ज़िन्दगी के सफ़र में
प्रेम से आ जाए
पाकर इसे सबका जीवन
हर्षित हो बीत जाए|