मुझे अब नींद की तलाश नही
अब रातो को जाग्ना अच्छा लगता है
मुझे नही मालूम की वो मेरी है या नही
मगर खुदा से उसे माँगना अच्छा लगता है
जाने मुझे हक है या नही
पर उसकी परवाह करना अच्छा लगता है
उसे प्यार करना सही है या नही
पर इस एहसास को जीना अच्छा लगता है
कभी हम साथ होंगे या नही
पर ये ख्वाब देखना अच्छा लगता है
वो मेरी है या नही
पर उसे अपना कहना अच्छा लगता है
दिल को समझाया बहुत पर मानता ही नही
शायद इसे भी उसके लिये धडकना अच्छा लगता है||