Launchorasince 2014
← Stories

हमारे हिस्से क्या रह गया

उनके हिस्से आई लाचारी, तो हमारे हिस्से अहम रह गया
उनके हिस्से आई रसोई, तो हमारे हिस्से दफ़्तर रह गया

उनके हिस्से आई ससुराल की बेड़िया, तो हमारे हिस्से बीवी या माँ को चुनने का फ़ैसला रह गया
उनके हिस्से आई ममता, तो हमारे हिस्से कठोरता रह गया

उनके हिस्से आई तकलीफ़, तो हमारे हिस्से ख़ून पसीना रह गया
उनके हिस्से आयी परिवार की बाग़डोर, तो हमारे हिस्से परिवार चलाने का बोझा रह गया

उनके हिस्से आई बच्चों की परवरिश, तो हमारे हिस्से उनका पालन-पोषण रह गया
उनके हिस्से आई खाना बनाने की ज़िम्मेदारी, तो हमारे हिस्से उस खाने के लिए कमाना रह गया

उनके हिस्से आई दहशत, तो हमारे हिस्से ज़िल्लत का वक़्त रह गया
उनके हिस्से जब आयी मौत, तो हमारे हिस्से कुछ भी न रह गया