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निर्भया और असिफ़ा का मिलन

आज ज़न्नत में कुछ अज़ब हुआ।
निर्भया का असिफ़ा से मिलन हुआ।।
थे दोनों के ज़िस्म ख़ून से सने।
पर सुन रहीं थीं दोनों ही तानें।
एक ने सुना के वो रात को क्यों निकली।
था साथ एक लड़का तू बेशर्म ही है पगली।।
दूजी का क़सूर बस इतना ही समाज ने निकाला।
रहीम की वो बेटी क्यों साथ उसका निभाना।।
कहा असिफ़ा ने एक बात पूछूं आपा।
क्या मुझसे ही था हवस उन्हें मिटाना।।
उनकी भी तो बहन, बीवी या बेटी होंगी।
क्या यह सब देख वो नहीं रोतीं होंगी।।
निर्भया को भी कई सालों से ये था जानना।
क्यों मार्च कर के ही लोगों को है आक्रोश जताना।।
दोनों ने की फिर एक बात।
चले ख़ुदा, भगवान, जीसस के पास।।
पूछा दोनों ने कसूर क्या हमारा था।
क्या यह संसार इसी तरह तुम्हें चलाना था।।
हमारे जैसी कई बेबस पड़ीं हैं आज भी।
कोई राजनीति तो कोई मज़हब के बीच फ़सी हैं आज भी।।
तुम मौन क्यों हो बोल दो।
सुनते नही क्यों बोल दो।।
दुनिया तुम्हारी लूट गयी।
तेरे भक्तों के हाथों बिक गयी।।
कोई निर्भया बनी।
कोई असिफ़ा बनी।।
कल दुर्गा और सलमा भी आएँगी।
वो भी सवाल यही दोहराएँगी।।
एक काम करो अल्लाह, प्रभु।
मस्ज़िद में रहो या मंदिर में बसो।
रहना है तो इंसान बन।
इंसानों के रूह में बसो।।

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