अपने प्रिय दोस्त पर एक कविता जो उसके जन्मदिन पर साझा कररही ….
वो एक भूरी आंखों वाला मासूम सा चेहरा ..
जिससे बात किए बिना लगे दिन है कुछ अधूरा
वो रहा सदा अवलम्बन मेरा..
जब भी विचलित हुआ मन जरा...
धुँधली सी उन यादों में..
बस याद रहा वो कुछ वादों में..
उसकी मुस्कान से मैं बहल जाती...
लेकिन उसकी आंखों से भी डर जाती..
जब उसकी बातों में एक तपिश आती..
खुद को अकेला तन्हा पाती...
उसको देख मैंने जीवन जीना जाना
साथ साथ कदम ताल मिलाना..
वक्त की आँधी ने भले दूर किया..
दिल की तड़प ने फिर एक किया...
मन का कोना सदा खाली रहा..
आकर उसने फिर उसे गुलज़ार किया...
बस बना रहे ये साथ हमारा..
जब तक जीवन का न आये किनारा..
मांगू रब से बस यही दुआ..
उसके जीवन में रहे बहार सदा..
कल मैं रहूँ न रहूँ फिर भी
उसके दिल में मेरी याद रहे..
गर अगला जीवन मिले तो
हर पल का मुझे फिर साथ मिले...
मेरी सबसे प्रिय दोस्त को समर्पित मेरे मन की बात..
-लवीना