Launchorasince 2014
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पति - पत्नी की जुगलबंदी

दफ़्तर से घर लौटे ही थे ,

कि बात कुछ इस तरह शुरू हुई 

हमारी प्राणप्रिया छूटते ही बोलीं ,

"जनाब आने में इतनी देरी क्यों हुई ?" 


"अरे ! पहले पानी तो देदो "

चिड़चिड़ा कर हम बोले 

"चुपचाप बताइए किसके घर से खाकर आ रहे हैं , 

पानी पूरी और छोले भटूरे ?" 


पत्नी के ऐसा बोलते ही 

हमने उनके लिए खरीदी अंगूठी बाहर निकाली,

वह खुशी से उछल पड़ी , बोलीं 

"अरे पानी क्या , आज तो सारी बोतल तुम्हारी" 


फिर उसने प्यार से कुछ ऐसा फ़रमाया ,

" इतना खर्चा क्यों किया ! 

आज ही तो हमने 

सारा अकाउंट खाली करवाया " 


कुछ और बोलने की वजह अब न रही ,

हमने मन में सोचा 

"इतनी प्यार से हो बोल रही ,

जैसे समस्या की अनामिका को 

तुम ही हो समाधान की अंगूठी !  "